भार्गव दादा जीवन परिचय – Bhargav Dada Biography in Hindi

आज भी मुंबई के दादर इलाके में कोई बदमाशि या गुंडई करता है तो उसे भार्गव दादा का उदाहरण दिया जाता है। एक जमाना था जब भार्गव दादा का हफ्ता खौफ मुंबई के दादर इलाके के सभी व्यापारियों के मन में बसता था। आज हम आपको उसी भार्गव दादा का जीवन परिचय के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देने जा रहे है।

मुंबई के डॉन के किस्सों में दाऊद इब्राहिम का नाम कोई कभी नहीं भूल सकता, मगर 80 के दशक में दाऊद इब्राहिम के नाक में दम कर देने वाले डॉन मन्या सुर्वे को भी कोई नहीं भूल सकता जो भार्गव दादा का छोटा भाई था। भार्गव दादा उस गैंग से ताल्लुक रखता है जिस गैंग ने दाऊद इब्राहिम की गैंग 80 के दशक में पानी पिला दिया था। आखिर कौन था भार्गव दादा? और इसका किस तरह अन्य बड़े बड़े डॉन के साथ संबंध शुरू हुआ इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी आज के लेख में दी गई है। 

भार्गव दादा का संक्षिप्त जीवन परिचय 

नामभार्गव सुर्वे
उपनामभार्गव दादा
जन्म स्थानमुंबई, दादर 
देशभारत
कार्यडॉन
प्रचलित होने का कारणमन्या सुर्वे को धंधे में लाने की वजह से
मृत्य1969 में उम्र कैद की सजा में

कौन था भार्गव दादा? 

1980 से 1985 तक मुंबई में मन्या सुर्वे का कहर चलता था जिसे पुलिस ने मुंबई के सबसे बड़े एनकाउंटर में मारा था। उसी कुख्यात डॉन के बड़े भाई का नाम भार्गव दादा था। 1965 से 1980 तक मुंबई के दादर इलाके में भार्गव दादा हफ्ता वसूली का काम करता था।

भार्गव दादा मन्या सुर्वे का सौतेला बड़ा भाई था जो उसे इस डॉन की दुनिया में लेकर आया था। भार्गव दादा का जन्म मुंबई में ही हुआ था 1965 से उसने दादर के इलाके में हफ्ता वसूली का काम शुरू किया था जहां उसने हर व्यापारी के मन में अपना खोफ भर दिया था।

भार्गव दादा का जीवन परिचय?

भार्गव दादा का वास्तविक पूरा नाम भार्गव सुर्वे था जिसका जन्म मुंबई के दादर में हुआ था। बचपन काफी गरीबी में बीता और पैसे की चाह ने उसे लूटमार और लड़ाई झगड़े के क्षेत्र में पहुंचा दिया। वहां उसने हफ्ता वसूली के काम को सीखा और धीरे-धीरे दादर का भार्गव दादा के नाम से प्रचलित हो गया।

भार्गव दादा 1960 से 1970 तक काफी सक्रिय था इस बीच के साल में दादर के व्यापारी उससे बहुत डरते थे और हफ्ते की रकम उसके घर तक पहुंचा कर आते थे। उसका सौतेला भाई मन्या सुर्वे इसे देखता था और पैसे की लालच में वह भी अपने बड़े भाई के साथ इस काम में लग गया। 1969 में दानदेकर हत्या कांड कांड हुआ, इसमें भार्गव दादा, पौधाकर, और मन्या सुर्वे ने मिलकर दानदेकार नाम के व्यापारी का मर्डर कर दिया। इस मर्डर की वजह से इन तीनों को उम्र कैद की सजा सुना दी गई। बाद में उम्र कैद से मन्या सुर्वे फरार हो गया था और उसने और जुर्म किया मगर भार्गव दादा उम्र कैद से भाग नहीं पाया और पुणे के जेल में उम्र कैद की सजा काटते हुए 1980 के आसपास उसकी मृत्यु हो गई। 

 (FAQ)

भार्गव दादा कौन था?

भार्गव दादा एक प्रचलित डॉन था जो मुंबई के दादर इलाके में हफ्ता वसूली करने की वजह से प्रचलित था। 

मन्या सुर्वे और भार्गव दादा में क्या रिश्ता था?

भार्गव दादा मन्या सुर्वे का सौतेला बड़ा भाई था जो उसे इस बुराई की दुनिया में लेकर आया था। 

भार्गव दादा कैसे मरा?

भार्गव दादा ने 1969 में एक मर्डर किया था, जिसकी सजा मैं उसे उम्र कैद की सजा दी गई थी और वह उम्र कैद की सजा काटते हुए जेल में ही मर गया था।

निष्कर्ष

आज इस लेख में हमने आपको भार्गव दादा जीवन परिचय के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी है। हमने आपको यह बताने का प्रयास किया है कि भार्गव दादा कौन था और किस प्रकार वह मुंबई में एक प्रचलित डॉन के रूप में सबके समक्ष आया था। अगर इस लेख को पढ़ने के बाद अब बाहर करता था और उसका मन्या सुर्वे के साथ रिश्ता समझ पाए हैं तो इसे अपने मित्रो के साथ साझा करे।

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